कैसे इस्तेमाल करें – EMI कैलकुलेटर
- आप जितना लोन लेना चाहते हैं वह रकम लिखें या स्लाइडर खिसकाएँ।
- बैंक या NBFC की सालाना ब्याज दर लिखें।
- अवधि वर्षों या महीनों में चुनें।
- दाईं ओर अपनी मासिक EMI, कुल ब्याज और कुल भुगतान देखें। हर साल बकाया कैसे घटता है, यह देखने के लिए सालाना तालिका खोलें।
फ़ॉर्मूला
- P = लोन की रकम (मूलधन)
- r = मासिक ब्याज दर = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100
- n = कुल मासिक किस्तों की संख्या (महीनों में अवधि)
उदाहरण: ₹10 लाख का होम लोन, 10% ब्याज पर, 20 साल के लिए
P = ₹10,00,000, r = 10 ÷ 12 ÷ 100 = 0.008333 और n = 20 × 12 = 240 महीने।
इन्हें फ़ॉर्मूले में रखने पर EMI लगभग ₹9,650 आती है। 240 महीनों में आप कुल ₹23,16,052 चुकाते हैं, जिसमें से ₹13,16,052 ब्याज है – यानी लोन से भी ज़्यादा।
अवधि 15 साल करने पर EMI लगभग ₹10,746 हो जाती है, लेकिन ₹3.8 लाख से ज़्यादा ब्याज बचता है।
घटते बकाये पर EMI कैसे बनती है
भारत में बैंक EMI घटते बकाये (reducing balance) पर गिनते हैं। हर महीने ब्याज सिर्फ़ बची हुई रकम पर लगता है। शुरुआती सालों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है; बकाया घटने के साथ मूलधन का हिस्सा बढ़ता जाता है। ऊपर की सालाना तालिका यह बदलाव साफ़ दिखाती है।
EMI का बोझ घटाने के उपाय
छोटे बदलाव लोन की पूरी अवधि में लाखों रुपये बचा सकते हैं:
- ज़्यादा डाउन पेमेंट करके कम लोन लें।
- अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें मिलाएँ – लंबे लोन में 0.5% कम दर भी बड़ा फ़र्क डालती है।
- बोनस मिलने पर प्रीपेमेंट करें। व्यक्तियों के फ़्लोटिंग रेट लोन पर RBI के नियमों के अनुसार बैंक प्रीपेमेंट शुल्क नहीं ले सकते।
- जितनी EMI आराम से भर सकें, वह सबसे छोटी अवधि चुनें – कुल EMI अपनी हाथ में आने वाली आय के 40% से कम रखें।